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देवनागरी:
''ते आख़र उह जित्त गिआ''---बलबीर
कौर संघेड़ा |
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देवनागरी:
आखरी
ग़जरा---रोज़ी
सिंघ --6
January 2009 |
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देवनागरी:
''थाई
यक्के दी सवारी"-----रिशी गुलाटी,
मैलबौरन (आसटरेलीआ) 6 January 2009 |
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देवनागरी:
विच्चली गल्ल:
वे रक्ख लिआ मेमां ने, विहु खा के मर जावां---
बी.ऐस्स. ढिल्लों ऐडवोकेट---6
January 2009 |
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देवनागरी:
ज़िंदगी दा जशन---------------केहर
शरीफ़--5 January 2009 |
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देवनागरी:
राजनीती किउं करदी फिरदी हर खेतर 'ते कबज़ा?---शाम
सिंघ (अंग संग) 2 January 2009 |
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Writings in Devnagri
Script Year 2008 |
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देवनागरी/कविता-निऊयारक
विच वसदे उरदू शाइर अशरफ़ मीआं दीआं दो नज़मां--अनुवाद:
सुरिंदर सोहल-22
December 2008 |
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देवनागरी:
पंजाबीए ज़ुबाने नी राकाने मेरे देस दीए(4)----डा.
जसबीर कौर |
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देवनागरी:
वलैती चुड़ेलां-I----गुरबीर
सिंघ भुल्लर, सविटज़रलैंड--20
December 2008 |
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देवनागरी:
विआह बनाम धोखा/ कैनेडा दी इमीग्रेशन लई पवित्तर रिशतिआं दी हुंदी
है नित्त तौहीन ---परमजीत
जोशी---15
December 2008 |
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देवनागरी/कविता---मिशन:
साथी लुधिआणवी,
लंडन--14 December 2008 |
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देवनागरी:
किउं
चली गई?--अनमोल
कौर--14 December 2008 |
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देवनागरी:
दो रुक्खां दा वारतालाप--प्रो:
सत्तपाल गोइल--12
December 2008 |
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देवनागरी:
'गुरू दे नाल' किउं कही जाईए, जद उस दी कोई ना मन्नीएं----शाम
सिंघ (अंग-संग) |
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देवनागरी:
गज़ल/कज़ा--केहर
शरीफ़ |
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सत्त कवितावां:
चरनजीत सिंघ पन्नू |
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देवनागरी:
किसानां दीआं खुदकुशीआं अते सभिआचारक टुट्टभज्ज--करम
बरसट |
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देवनागरी:
राशटरी
मीडीए दा गैर-जमूहरी समाज विगिआन--यादविंदर
करफिऊ |
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देवनागरी:
¿कलदार के कलदास?-रूप
ढिल्लों |
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देवनागरी:
अमरीका दा नवां प्रधान, बराक ओबामा--दलजीत
सिंघ, ऐडमिंटन
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देवनागरी:
बाल मजदूरी----रमन संधू |
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देवनागरी:
(विचली गल्ल)
बुढ्ढीआं दी पंजाबी बनांम चीननां दी चीं चीं
---बरिंदर ढिल्लों ऐडवोकेट |
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देवनागरी:
पंजाबीए ज़ुबाने नी राकाने मेरे देस दीए
(3)----डा. जसबीर कौर |
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देवनागरी:
हर साल जलाउण ते वी किउं नहीं मरदा रावण?----मेजर
मांगट |
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देवनागरी:
प्रमाणूं संधी दी फौजी अते आरथक विआकरण--करम
बरसट |
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देवनागरी:
संवाद---उह
दिन--तलविंदर सिंघ |
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देवनागरी:
अहिंसा--दलजीत
सिंघ, ऐडमिंटन
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देवनागरी:
बंबां दे बिसतर 'ते पिआ ए भारत -रोज़ी
सिंघ |
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देवनागरी:
संसदी जां मीडीआई इतिहास दा काला दिन..?--यादविंदर
करफिऊ |
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देवनागरी:
ग़ज़ल----गुरदेव सिंघ घणगस |
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देवनागरी:
हिंसा--दलजीत
सिंघ, ऐडमिंटन |
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देवनागरी:
पँजाब विच्च
लुट्टां खोहां दी लहिर----हरबीर
सिँघ भंवर--19
July 2008 |
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देवनागरी:
फाड़ी ते खरबूज़ा-
केहर शरीफ---7
July 2008 |
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देवनागरी:
किणमिण होवे
मथ्थे
अन्दर, रूह अन्दर बरसातां(24)-शाम
सिँघ (अंग-संग) |
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देवनागरी:
पुसतकां दी
उदासी-
केहर शरीफ़
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